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सोमवार, 23 सितंबर 2019

उजास बनाएगा इतिहास, ऑनलाइन बुकिंग आज से प्रारंभ, 25 से रोजाना लकी ड्रा निकाल दिए जाएंगे ईनाम

रायपुर। सोशल मीडिया के इस युग मे आज जहां एक एक बुक बेचने में लोगो को भारी मशक्कत करनी पड़ती है वहीं उजास के ऑनर को भरोसा है कि अपने बेहतर कन्टेंट और बेहतरीन स्कीम के दम पर उजास बिक्री के सारे रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया इतिहास रचेगी। सी जी एक्सप्रेस ग्रुप द्वारा दीपावली के अवसर पर 300 प्लस पेज में मैगजीन साइज में प्रकाशित इस बुक की कीमत मात्र 300 रुपये है वही बुक की खरीदी पर लकी ड्रा के माध्यम से लाखों के ईनाम बांटे जाएंगे।

सीजी एक्सप्रेस ग्रुप द्वारा दीपावली के अवसर पर तीन सौ प्लस पेज में विशेषांक उजास का प्रकाशन किया जा रहा है, उजास का आशय उजाला अथवा रौशनी होता है। विशेषांक उजास मैगजीन साइज में तीन सौ प्लस पेज में होगा। दीपावली के अवसर पर निकलने वाले इस विशेषांक की ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार की बुकिंग प्रारंभ हो गई है। उजास की कीमत सिर्फ तीन सौ रूपए है वहीं उजास बुक करने वाले को तीन बार लकी ड्रा में भाग लेने का अवसर मिलेगा तथा पाठक उजास की बुकिंग कर लाखों के इनाम जीत सकते हैं। लकी ड्रा निकाल 25 सितंबर से प्रतिदिन पांच लकी विनर को होम थियेटर अथवा ब्लू टूथ स्पीकर इनाम में दिया जाएगा वहीं सप्ताह में एक लकी विनर को 32 इंच एलइडी टीवी दिया जाएगा वहीं बम्पर इनाम में कार, मोटर सायकल, स्कूटी, कूलर, फ्रीज, एसी, इंडक्शन आदि इनाम रखे गए हैं। इनामी आफर 27 अक्टूबर तक लागू है वही उजास की डिलिवरी दीवाली के बाद होगी।

3 सौ रुपए की उजास बदल सकती है किस्मत, इनाम में मिल सकते हैं कार, स्कूटी, मोटर साइकिल, एसी सहित बहुत कुछ

रायपुर। सीजी एक्सप्रेस ग्रुप द्वारा इस दिवाली मैगजीन साइज में 3 सौ प्लस पेज में विशेषांक उजास का प्रकाशन किया जा रहा है। सिर्फ 3 सौ रुपए का उजास बुक कर पाठक लकी ड्रा के माध्यम से कार, मोटर साइकिल, स्कूटी सहित लाखों के इनाम जीत सकते हैं। www.ujaas.in पर जाकर पाठक बड़ी आसानी से उजास की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं, वहीं अपने नजदीकी सी जी एक्सप्रेस संवाददाता के माध्यम से भी उजास की बुकिंग की जा सकती है। बुकिंग ऑफर दीवाली 27 सितम्बर तक है, वहीं उजास की डिलीवरी दीवाली के बाद होगी। 25 सितम्बर को उजास का पहला लकी ड्रा निकाला जाएगा। जिसके बाद रोज लकी ड्रा निकाल इनाम दिए जाएंगे।

सी जी एक्सप्रेस ग्रुप द्वारा इस इस दीवाली 3 सौ प्लस पेज में प्रकाशित होने वाली सिर्फ 300 रुपए की पुस्तक उजास के माध्यम से सैकड़ों पाठकों की किस्मत चमक सकती है तथा सिर्फ 3 सौ रुपए में उजास बुक कर पाठक कार, मोटरसाइकिल, स्कूटी सहित लाखों के इनाम जीत सकते हैं। उजास की वेबसाइट www.ujaas.in पर जाकर बडी आसानी से पाठक उजास की बुकिंग कर सकते हैं वहीं अपने नजदीकी सीजी एक्सप्रेस संवाददाता के माध्यम से भी उजास की बुकिंग की जा सकती है।

एक बार उजास बुक करने पर पाठक को तीन बार लकी ड्रा में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। 25 सितंबर से प्रतिदिन लकी ड्रा निकाल 5 लकी विनर को होम थियेटर अथवा ब्लू टूथ स्पीकर दिया जाएगा, वहीं हर सप्ताह एक लकी विनर को 32 इंच एलईडी कलर टीवी दिया जाएगा। बम्पर ड्रा में पाठकों को कार, मोटर साइकिल सहित लाखों के इनाम जीतने के अवसर होंगे।

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

दैनिक समाचार पत्र को आवश्यकता है विज्ञापन मैनेजर की, वेतन पांच अंकों में

Jobs Media
जांजगीर-चांपा एवं रायपुर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को जांजगीर-चांपा जिले में विज्ञापन मैनेजर की आवश्यकता है। आवेदक को प्रिंट अथवा इलेक्ट्रानिक मीडिया में विज्ञापन के क्षेत्र में कार्य करने का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है, उन्हें पांच अंकों में वेतन प्रदाय किया जाएगा। आवेदक को विज्ञापन के लिए प्न्लानिंग करना होगा वहीं अधिनस्थों की मीटिंग लेकर उन्हें मोटिवेट करना होगा, वार्षिक, त्रैमासिक एवं मासिक टारगेट लेकर उसे चेस करना होगा वहीं फिल्ड से विज्ञापन निकालकर उसे प्रकाशित करवाकर संबंधितों को बिल देकर पेमेंट लाना होगा। इच्छुक व्यक्ति संपादक दैनिक छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से महाकाली इंटरप्राइजेस के सामने लिंक रोड जांजगीर में संपर्क कर सकते हैं अथवा मो.नं. 7489405373 पर संपर्क कर सकते हैं। इच्छुक व्यक्ति अपना बायोडाटा इस पते पर भेजे - EMail - hr.chhattisgarhexpress@gmail.com
EPaper - chhattisgarhexpress.com

गुरुवार, 31 अगस्त 2017

आपका अपना अखबार दो साल का हो गया जश्न तो बनता है

Mono 2nd anniversary Dainik Chhattisgarh Express
आज से ठीक दो साल पहले 01 सितम्बर 2015 को आपके अपने अखबार छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का प्रकाशन जांजगीर से प्रारंभ हुवा था. 12 पेज के दैनिक अखबार के प्रकाशन की कल्पना कोई आम इंसान कर ही नही सकता, यही वजह रही की पहले ही दिन से बहुत से लोगो ने उल्टी गिनती शुरू कर दी. लेकिन ये जांजगीर चाम्पा की मिट्टी का कर्ज चुकाने की जिद ही रही की तमाम चुनौतियो के बाद भी आप सभी की बदौलत छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस लगातार आगे बढता गया. ये आपका अपना अखबार है, इसलिए क्योकि ये आपके अपने जिले से प्रकाशित होता है, इसलिए क्योकि इसे आप जैसे आपके अपने लोग प्रकाशित करते है, इसलिए क्योकि रोज रोज की चुनौतियो से जुझते हुवे इसे सिर्फ और सिर्फ आपके लिये प्रकाशित करते है. छत्तीसगढ एक्सप्रेस की पूरी टीम आपके बीच से है, इनकी हिम्मत आप हो, इनका हौसला आप हो. 1 सितंबर 2016 को जब आपका अपना अखबार 1 साल का हुवा तब आप सभी ने जमकर जश्न मनाया. अब जब 1 सितम्बर 2017 को दैनिक छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस पूरे दो साल का हो गया तब आप आपके अपने अखबार के दो साल के होने की खुशी मे दोहरा जश्न मनाइये. अपने घर परिवार मे, अपने संस्थान मे, अपने दोस्तो रिश्तेदारो के बीच इस अवसर पर जाकर केक काटिए, क्योकि अखबार आपका, खुशिया आपकी, जश्न आपका. और हाँ पिछले साल की तरह केक काटने के साथ साथ उसका एक फोटो, केक किस जगह काटा गया, उस समय कौन कौन लोग मौजूद थे आदि लिखकर मो. नं. 7489405373 पर whatsapp जरुर करे जिससे वो आपके अपने अखबार मे प्रकाशित हो सके

शुक्रवार, 23 जून 2017

Nature Aquarium the new craze amoung Raipurians


 Nature Aquarium, Aqua Interior Pet Store Raipur
Imagine tropical plants, exotic fish and visible expanses of colourful earth...in your drawing room! Yes, now you can recreate the beauty of the underwater world of Amazon. inside the confines of your home, all thanks to some Nature Aquarium experts who are painting the  city green , red  and blue. An acquired art form, allows you to create an underwater landscape inside a fish tank. Says nature aquarium expert AJAY PATEL, "Over the last five years, I've seen several people showing a keen interest in planted aquariums. In fact,some of my friends have also won top prizes in aquascaping contests held at Japan."


Want your own piece of nature?



THE TANK



It's better to choose a tank with height no more than 18 inches as that height helps the light penetrate till the bottom, which is a must for planted aquariums. Greater deapth of tank helps as well .
PLACEMENT

While choosing a place to keep the tank, avoid zones that experience frequent temperature fluctuations and direct sunlight. Avoid windows or kitchen corners. The location should be away from electrical/electronic equipment too.

MATERIAL AND EQUIPMENT

Substrate: The substrate is the soil on which the plants grow. It is spread at the bottom of the tank with a minimum height of 3 inches (may vary according to the kind of plants used). A large variety of readymade substrate are available in the market.  "For beginners, the quality of soil may be the key to their sucess .
ADA Amazonia as a matter of fact is the most effective when it comes to substrate.
ADA soil its characteristics and behaviour in aquarium is easy to predict as the compositions are controlled. If properly maintained (used in soft water with periodic doses of liquid fertilizers), it will lead to a sucess balance in your aquarium .

Light: You can opt for LED lights, tubelights, PLs or metal halides LED being the best. The general rule is 3-5 watts per gallon of water. If you have a 30 gallon aquarium, you need a light system of 120 watt or more.Whatever light you use, With proper equipment in place, eight to 10 hours of lighting in sufficient for plant growth.

CO2 (Carbon Dioxide): You need a cylinder to inject the gas in the water throughout the time the light is on. The amount of CO2 will vary from tank to tank, depending on plants, nutrition capacity of the soil and the amount of water. Remember, excessive CO2 can also kill the fishes.

Fertilizer: There is a range of fertilizers available in the market.Needless to say , it's absolutely necessary for plant growth.

Filtration: Chemicals from plants and leftover food can pollute the water. To remove these, a canister filter is required. Hang on back filters can also be used. As per require ment, chemical filters like activated charcoal can also be used.


Plants: Using plants such as Elocharis parvula, Echinodorus tenellus, Saggitaria subulata, Micranthemum umbrosum montecarlo and Marselia sp. Glosso stigma and Hemainthus cuba are great choices. Plants like Hygrophila polysperma, Cryptocoryne Family, Ludwigia family , Didplis diandra, Styurogen Family , Anubias family can be used as midground plants. Several varieties of underwater plants are available  in the market but may lead to unwanted pest and snails in your aquarium . Here tissue culture plants are your best bet as they are grown in a controlled environment and are pest free. They grow much denser and provide you with a better chance of success.

Decorative items: Generally , driftwood and rocks are used for decoration.As they are a realistic n funtional representaion of nature.


SETTING IT UP


Once you have zeroed in on the right spot and gathered the equipment, it's time to set up the aquarium. Start by spreading the substrate on the tank floor.  Decorate the soil and proceed to adding water, but only until it submerges the substrate. Place the plants one by one with the help of tweezers. Now fill the tank without disturbing the base. Setup the filter and lights. Change 80% of water once a week.
TANK LAYOUT

Design a layout for your aquarium -it's not very different from photography composition. You can go for triangular, `U' or island layout. A proper layout not only makes your tank look beautiful but also plays an important role in plant growth. Rule of thirds is a very common and general rule to follow

ADDING FISH
Fishes are rather essential for plant growth and to ensure a proper ecosystem and give the aquarium some movement. Choose from freshwater fishes and shrimps, but do not go for those that dig holes in the ground.
Make sure the fishes you choose are compatible with the plants. Neon tetra, Harlequin Rasbora, Rummy Nose Tetra can be good additions. Many algae eaters and shrimps that live happily in the planted tank.


WATCH OUT FOR:
CO2 level must never exceed the required level.Water temperature must not be higher than 28 degree centigrade. Direct sunlight, plastic and other chemical contamination must be avoided.The water must be soft and chlorine free.Use of light and fertilizer must be proportionate. Lights should be turned on for at least 7 hours per day.

HOW WOULD YOU KNOW YOU ARE DOING IT RIGHT:
Plants would be lush green and healthy, without any algae, snails and leech.Plants would release small oxygen bubbles after the lights remain on for five to six hours.The fish would roam around the tank and not float near the water surface.Plants and some fishes would breed inside the tank.
 Nature Aquarium, Aqua Interior Pet Store Raipur


WHY YOU NEED A PLANTED AQUARIUM:

* At schools and public facilities: 
** An effective educational tool to instil a sense of responsibility towards Nature.

* At work places, business establishments:
** Reduces stress, enhances motivation and increases efficiency among employees.

* At hotels and spas:
** A healing space will increase footfall.

* At medical institutions:
** Helps reduce pre-treatment anxieties.

* At homes:
** It relaxes and enriches our lives. Afterall who doesnot require a piece on nature in their home.
Nature Aquarium, Aqua Interior Pet Store Raipur

शनिवार, 16 जुलाई 2016

जीवन के तीन मंत्र



☄ *आनंद में- वचन मत दीजिये*
☄ *क्रोध में - उत्तर मत दीजिये*
☄ *दुःख में - निर्णय मत लीजिये*

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💐💎    जीवन मंत्र      💎💐
१) धीरे बोलिये   - शांति मिलेगी
२) अहम छोड़िये  - बड़े बनेंगे
३) भक्ति कीजिए   - मुक्ति मिलेगी
४) विचार कीजिए  - ज्ञान मिलेगा
५) सेवा कीजिए    - शक्ति मिलेगी
६) सहन कीजिए   - देवत्व मिलेगा
७) संतोषी बनिए   - सुख मिलेगा.

"इतना छोटा कद रखिए कि सभी आपके साथ बैठ सकें और इतना बड़ा मन रखिए कि जब आप खड़े हो जाऐं तो कोई बैठा न रह सके"

जिसने भी लिखा उम्दा लिखा

यह नदियों का मुल्क है,
पानी भी भरपूर है ।
बोतल में बिकता है,
पन्द्रह रू शुल्क है ।

यह गरीबों का मुल्क है,
जनसंख्या भी भरपूर है ।
परिवार नियोजन मानते नहीं,
नसबन्दी नि:शुल्क है ।

यह अजीब मुल्क है,
निर्बलों पर हर शुल्क है ।
अगर आप हों बाहुबली,
हर सुविधा नि:शुल्क है ।

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यह अपना ही मुल्क है,
कर कुछ सकते नहीं ।
कह कुछ सकते नहीं,
बोलना नि:शुल्क है ।

यह शादियों का मुल्क है,
दान दहेज भी खूब है ।
शादी करने को पैसा नहीं,
कोर्ट मैरिज नि:शुल्क हैं ।
:
यह पर्यटन का मुल्क है,
रेलें भी खूब हैं ।
बिना टिकट पकड़े गए तो,
रोटी-कपड़ा नि:शुल्क है ।

यह अजीब मुल्क है,
हर जरूरत पर शुल्क है ।
ढूंढ कर देते हैं लोग,
सलाह नि:शुल्क है ।

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यह आवाम का मुल्क है,
सरकार चुनने का हक है ।
वोट देने जाते नहीं,
मतदान नि:शुल्क है ।

यह शिक्षकों का मुल्क है,
पाठशालाएं भी खूब हैं ।
शिक्षकों को वेतनमान देने के पैसे नहीं,
पढ़ना,खाना,पोशाक निःशुल्क है ।
उरुग्वे एक ऐसा देश है जिसमे औसतन हर एक आदमी के पास 4 गायें हैं.. और पुरे विश्व में वो खेती के मामले में नंबर वन हैं.. सिर्फ 33 लाख लोगों का देश है और 1 करोड़ 20 लाख गायें है|

हर एक  गाय के कान पर इलेक्ट्रॉनिक  चिप लगा रखी है। जिससे कौनसी गाय कहाँ पर है वो देखते रहते हैं |

एक किसान मशीन के अंदर बैठा फसल कटाई कर रहा है तो दूसरा उसे स्क्रीन पर जोड़ता है कि फसल का डाटा क्या है ?
इकठ्ठा किये हुये डाटा के जरिए किसान प्रति वर्ग मीटर की पैदावार का स्वयं विश्लेषण करता हैं ! 2005 में 33 लाख लोगों का देश 90 लाख लोगों के लिए अनाज पैदा करता था .. और आज की तारीख में 2 करोड़ 80 लाख लोगों का अनाज पैदा करता है..उरुग्वे के सफल प्रदर्शन के पीछे देश, किसानों और पशुपालकों का दशकों का अध्ययन शामिल है।

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पूरी खेती को देखने के लिए 500 कृषि इंजिनीयर लगाए गए हैं और ये लोग ड्रोन और सैटेलाइट से किसानो पर नजर रखते हैं, कि खेती का वही तरीका अपनाएं जो निर्धारित है .. याने दूध दही घी मक्खन के साथ आबादी से कई गुना ज्यादा अनाज उत्पादन.. सब अनाज, दूध, दहीं, घी, मक्खन, आराम से निर्यात होता है और हर किसान लाखों में खेलता है..

कम से कम आय एक आदमी की 1,25,000 महिनें की है यानि 19000 डॉलर सालाना !

इस देश का राष्ट्रीय चिन्ह सूर्य  व राष्ट्रीय प्रगति चिन्ह गाय  व घोडा  हैं !!

उरूग्वे में गाय की हत्या पर तत्काल फाँसी का कानून हैं  !

( सोशल मीडिया पर आधारित, सत्यता के बारे में पाठक स्वयं जांच ले )

कृष्ण और बलराम

महाभारत काल की बात है। एक बार कृष्ण और बलराम किसी जंगल से गुजर रहे थे। चलते-चलते काफी समय बीत गया और अब सूरज भी लगभग डूबने वाला था। अँधेरे में आगे बढना संभव नहीं था, इसलिए कृष्ण बोले, “ बलराम, हम ऐसा करते हैं कि अब सुबह होने तक यहीं ठहर जाते हैं, भोर होते ही हम अपने गंतव्य की और बढ़ चलेंगे।”

बलराम बोले, “ पर इस घने जंगल में हमें खतरा हो सकता है, यहाँ सोना उचित नहीं होगा, हमें जाग कर ही रात बितानी होगी।”

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“अच्छा, हम ऐसा करते हैं कि पहले मैं सोता हूँ और तब तक तुम पहरा देते रहो, और फिर जैसे ही तुम्हे नींद आये तुम मुझे जगा देना; तब मैं पहरा दूंगा और तुम सो जाना।”, कृष्ण ने सुझाव दिया।

बलराम तैयार हो गए।

कुछ ही पलों में कृष्ण गहरी नींद में चले गए और तभी बलराम को एक भयानक आकृति उनकी ओर आती दिखी, वो कोई राक्षस था।

राक्षस उन्हें देखते ही जोर से चीखा और बलराम बुरी तरह डर गए।

इस घटना का एक विचित्र असर हुआ- भय के कारण बलराम का आकार कुछ छोटा हो गया और राक्षस और विशाल हो गया।

उसके बाद राक्षस एक बार और चीखा और पुन: बलराम डर कर काँप उठे, अब बलराम और भी सिकुड़ गए और राक्षस पहले से भी बड़ा हो गया।

राक्षस धीरे-धीरे बलराम की और बढ़ने लगा, बलराम पहले से ही भयभीत थे, और उस विशालकाय राक्षस को अपनी और आता देख जोर से चीख पड़े –“कृष्णा…” ,और चीखते ही वहीँ मूर्छित हो कर गिर पड़े।

बलराम की आवाज़ सुन कर कृष्ण उठे, बलराम को वहां देख उन्होंने सोचा कि बलराम पहरा देते-दते थक गए और सोने से पहले उन्हें आवाज़ दे दी।


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अब कृष्ण पहरा देने लगे।

कुछ देर बाद वही राक्षस उनके सामने आया और जोर से चीखा।

कृष्ण जरा भी घबराए नही और बोले, “बताओ तुम इस तरह चीख क्यों रहे हो, क्या चाहिए तुम्हे?”

इस बार भी कुछ विच्त्र घटा- कृष्ण के साहस के कारण उनका आकार कुछ बढ़ गया और राक्षस का आकर कुछ घट गया।

राक्षस को पहली बार कोई ऐसा मिला था जो उससे डर नहीं रहा था। घबराहट में वह पुन: कृष्ण पर जोर से चीखा!

इस बार भी कृष्ण नहीं डरे और उनका आकर और भी बड़ा हो गया जबकि राक्षस पहले से भी छोटा हो गया।

एक आखिरी प्रयास में राक्षस पूरी ताकत से चीखा पर कृष्ण मुस्कुरा उठे और फिर से बोले, “ बताओ तो क्या चाहिए तुम्हे?”

फिर क्या था राक्षस सिकुड़ कर बिलकुल छोटा हो गया और कृष्ण ने उसे हथेली में लेकर अपनी धोती में बाँध लिया और फिर  कमर में खोंस कर रख लिया।

कुछ ही देर में सुबह हो गयी, कृष्ण ने बलराम को उठाया और आगे बढ़ने के लिए कहा! वे धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे तभी बलराम उत्तेजित होते हुए बोले, “पता है कल रात में क्या हुआ था, एक भयानक राक्षस हमे मारने आया था!”

“रुको-रुको”, बलराम को बीच में ही टोकते हुए कृष्ण ने अपनी धोती में बंधा राक्षस निकाला  और बलराम को दिखाते हुए बोले, “कहीं तुम इसकी बात तो नहीं कर रहे हो?”

“हाँ, ये वही है। पर कल जब मैंने इसे देखा था तो ये बहुत बड़ा था, ये इतना छोटा कैसे हो गया?”, बलराम आश्चर्यचकित होते हुए बोले।

कृष्ण बोले, “ जब जीवन में तुम किसी ऐसी चीज से बचने की कोशिश करते हो जिसका तुम्हे सामना करना चाहिए तो वो तुमसे बड़ी हो जाती है और तुम पर नियंत्रण करने लगती है लेकिन जब तुम उस चीज का सामना करते हो जिसका सामना तुम्हे करना चाहिए तो तुम उससे बड़े हो जाते हो और उसे नियंत्रित करने लगते हो!”

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दोस्तों, ये राक्षस दरअसल, हमारी life में आने वाले challenges हैं, विपरीत स्थितियां हैं, life problems हैं! अगर हम इन situations को avoid करते रहते हैं तो ये समस्याएं और भी बड़ी होती चली जाती हैं और ultimately हमें control करने लगती हैं लेकिन अगर हम इनका सामना करते हैं, courage के साथ इन्हें face करते हैं तो यही समस्याएं धीरे-धीरे छोटी होती चली जाती हैं और अंततः हम उनपर काबू पा लेते हैं। इसलिए जब कभी भी life में ऐसी problems आएं जिनका सामना आपको करना ही चाहिए तो उसे अवॉयड मत करिए…जिसे फेस करना है उसे फेस करिए, उससे बचने की कोशिश मत करिए, जब आप ऐसा करेंगे तो देखते-देखते ही वे समस्याएं इतनी छोटी हो जायेंगी कि आप आराम से उनपर नियंत्रण कर सकेंगे और उन्हें हेमशा-हमेशा के लिए ख़त्म कर सकेंगे!

रावण का चमत्कार या राम का...पावर...?? ( एक हास्य रस का सस्पेँश कथा )










श्री राम के नाम से पत्थरो के तैरने की news जब लंका पहुँची , तब वहाँ की public में काफी gossip हुआ कि भैया जिसके नाम से ही पत्थर तैरने लगें,  वो आदमी क्या गज़ब होगा।


इस तरह की बेकार की अफ़वाहों से परेशान रावण ने तैश में आकरannounce करवा दिया कि कल रावण
के नाम लिखे हुए पत्थर भी पानी में तिराये जायेंगे।

और अगले दिन लंका में public holiday declare कर दिया गया। निश्चित दिन और समय पर सारी population
रावण का चमत्कार देखने पहुँच गयी।

Set time पर रावण अपने भाई - बँधुओं , पत्नियों तथा staff के साथ वहाँ पहुँचे और एक भारी से पत्थर पर उनका नाम लिखा गया।

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Labor लोगों ने पत्थर उठाया और उसे समुद्र में डाल दिया -- पत्थर सीधा पानी के भीतर !

सारी public इस सब को साँस रोके देख रहे थी जबकी रावण लगातार मन ही मन में मँत्रोच्चारण कर  रहे थे।

अचानक, पत्थर वापस surface पर आया और तैरने लगा। Public पागल हो गयी , और 'लँकेश की  जय' के कानफोड़ू नारों ने आसमान को गुँजायमान कर दिया।

एक public celebration के बाद रावण अपने लाव लश्कर के साथ वापस अपने महल चले गये और public को भरोसा हो गया कि ये राम तो बस ऐसे ही हैं पत्थर तो हमारे महाराज रावण के नाम से भी तिरते हैं।

पर उसी रात को मँदोदरी ने notice किया कि रावण bed में लेटे हुए बस ceiling को घूरे जा रहे थे।

“ क्या हुआ स्वामी ? फिर से acidity के कारण नींद नहीं आ रही क्या ?” eno दराज मे पडी है ले कर  आऊँ ? - मँदोदरी ने पूछा।

मँदु ! रहने दो , आज तो  इज़्ज़त बस लुटते लुटते बच गयी।  आइन्दा से ऐसे  experiment नहीं करूंगा। " ceiling को लगातार घूर रहे रावण ने जवाब दिया।

मँदोदरी चौंक कर उठी और बोली , “ऐसा क्या हो गया स्वामी ?”

रावण ने अपने सर के नीचे से हाथ निकाला और छाती पर रखा , “ वो आज सुबह याद है पत्थर तैरा था ?”

मँदोदरी ने एक curious smile के साथ हाँ मे सर हिलाया।

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पत्थर जब पानी में नीचे गया था , उसके साथ साथ मेरी साँस भी नीचे चली  गयी थी। रावण ने कहा।

इसपर confused मँदोदरी ने कहा , पर पत्थर वापस ऊपर भी तो आ गया था ना । वैसे ऐसा कौन सा मँत्र पढ़ रहे थे आप जिससे पानी में नीचे गया पत्थर  वापस आकर तैरने लगा ?”

इस पर रावण ने एक लम्बी साँस ली और बोले , मँत्र-वँत्र कुछ नहीं पढ़ रहा था बल्कि बार बार बोल रहा था कि
हे पत्थर ! तुझे राम की कसम,  PLEASE डूबियो मत भाई !! "
.
राम नाम मेँ है दम !!
बोलो
जय श्री राम !!

चरित्र ( Kahani )

एक नगर में रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति दूर-दूर तक थी। पास ही के गाँव मे स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से, उन्हें वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था।

एक बार वे अपने गंतव्य की और जाने के लिए बस मे चढ़े, उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जाकर बैठ गए।

कंडक्टर ने जब किराया काटकर उन्हे रुपये वापस दिए तो पंडित जी ने पाया की कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा दे दिए है। पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कंडक्टर को रुपये वापस कर दूँगा।

कुछ देर बाद मन मे विचार आया की बेवजह दस रुपये जैसी मामूली रकम को लेकर परेशान हो रहे है, आखिर ये बस कंपनी वाले भी तो लाखों कमाते है, बेहतर है इन रूपयो को भगवान की भेंट समझकर अपने पास ही रख लिया जाए। वह इनका सदुपयोग ही करेंगे।

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मन मे चल रहे विचार के बीच उनका गंतव्य स्थल आ गया  बस से उतरते ही उनके कदम अचानक ठिठके, उन्होंने जेब मे हाथ डाला और दस का नोट निकाल कर कंडक्टर को देते हुए कहा, "भाई तुमने मुझे किराया काटने के बाद भी दस रुपये ज्यादा दे दिए थे।"

कंडक्टर मुस्कराते हुए बोला, "क्या आप ही गाँव के मंदिर के नए पुजारी है?"

पंडित जी के हामी भरने पर कंडक्टर बोला,  "मेरे मन मे कई दिनों से आपके प्रवचन सुनने की इच्छा थी, आपको बस मे देखा तो ख्याल आया कि चलो देखते है कि मैं अगर ज्यादा पैसे दूँ तो आप क्या करते हो! अब मुझे विश्वास हो गया कि आपके प्रवचन जैसा ही आपका आचरण है। जिससे सभी को सीख लेनी चाहिए"
बोलते हुए, कंडक्टर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी।

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पंडित जी बस से उतरकर पसीना पसीना थे। उन्होंने हाथ जोड़कर भगवान का आभार व्यक्त किया, "प्रभु तेरा लाख लाख शुक्र है जो तूने मुझे बचा लिया, मैने तो दस रुपये के लालच मे तेरी शिक्षाओ की बोली लगा दी थी। पर तूने सही समय पर मुझे सम्हलने का अवसर दे दिया।"

दोस्तो...!

कभी कभी हम भी तुच्छ से प्रलोभन में, अपने जीवन भर की चरित्र पूंजी दांव पर लगा देते है।

दोषी कौन ? (कहानी)

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था ।
राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका रहा था ।
उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी ।
तब पँजों में दबे साँप ने अपनी आत्म-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने फन से ज़हर निकाला ।
तब रसोईया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पका रहा था, उस लंगर में साँप के मुख से निकली जहर की कुछ बूँदें खाने में गिर गई ।
किसी को कुछ पता नहीं चला ।
फल-स्वरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने आये थे उन सब की जहरीला खाना खाते ही मौत हो गयी ।
अब जब राजा को सारे ब्राह्मणों की मृत्यु का पता चला तो ब्रह्म-हत्या होने से उसे बहुत दुख हुआ ।

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ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा .... ???
(1) राजा .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है ....
या
(2 ) रसोईया .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय वह जहरीला हो गया है ....
या
(3) वह चील .... जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी ....
या
(4) वह साँप .... जिसने अपनी आत्म-रक्षा में ज़हर निकाला ....

बहुत दिनों तक यह मामला यमराज की फाईल में अटका (Pending) रहा ....

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फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा ।
उस महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया पर रास्ता बताने के साथ-साथ ब्राह्मणों से ये भी कह दिया कि "देखो भाई ....जरा ध्यान रखना .... वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है ।"

बस जैसे ही उस महिला ने ये शब्द कहे, उसी समय यमराज ने फैसला (decision) ले लिया कि उन मृत ब्राह्मणों की मृत्यु के पाप का फल इस महिला के खाते में जाएगा और इसे उस पाप का फल भुगतना होगा ।

यमराज के दूतों ने पूछा - प्रभु ऐसा क्यों ??
जब कि उन मृत ब्राह्मणों की हत्या में उस महिला की कोई भूमिका (role) भी नहीं थी ।
तब यमराज ने कहा - कि भाई देखो, जब कोई व्यक्ति पाप करता हैं तब उसे बड़ा आनन्द मिलता हैं । पर उन मृत ब्राह्मणों की हत्या से ना तो राजा को आनंद मिला .... ना ही उस रसोइया को आनंद मिला .... ना ही उस साँप को आनंद मिला .... और ना ही उस चील को आनंद मिला ।
पर उस पाप-कर्म की घटना का बुराई करने के भाव से बखान कर उस महिला को जरूर आनन्द मिला । इसलिये राजा के उस अनजाने पाप-कर्म का फल अब इस महिला के खाते में जायेगा ।

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बस इसी घटना के तहत आज तक जब भी कोई व्यक्ति जब किसी दूसरे के पाप-कर्म का बखान बुरे भाव से (बुराई) करता हैं तब उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा उस बुराई करने वाले के खाते में भी डाल दिया जाता हैं ।

अक्सर हम जीवन में सोचते हैं कि हमने जीवन में ऐसा कोई पाप नहीं किया, फिर भी हमारे जीवन में इतना कष्ट क्यों आया .... ??

ये कष्ट और कहीं से नहीं, बल्कि लोगों की बुराई करने के कारण उनके पाप-कर्मो से आया होता हैं जो बुराई करते ही हमारे खाते में ट्रांसफर हो जाता हैं ....

सोमवार, 15 सितंबर 2014

Amorphous Technology Solutions से वेबसाईट बनवाना मतलब अपने पैरो पर खुद ही कुल्हाड़ी मारना

छत्तीसगढ़ के एक छोटे से शहर से हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान के लगातार सफलतापूर्वक प्रकाशन के बाद हमें लगा कि इसको और नइ उंचाईयों तक पंहुचाने के लिए क्यों ना पंचायत की मुस्कान के नाम से एक वेबसाईट का निर्माण करा लिया जाए तब वेबसाईट बनाने वाली कई कंपनियों से प्रपोजल मंगवाए और लुभावने वादे को देखकर हमने Amorphous Technology Solutions कंपनी को वेबसाईट के निर्माण का ठेका दिया। कंपनी से बातें हुई की एक निश्चित राशि वेबसाईट बनवाते समय देने के बाद रखरखाव एवं डोमेन शुल्क नवीनीकरण का खर्चा देने पड़ेंगे जिसके एवज में कपंनी वेबसाईट का पूरा मेंटेनेंस देखेगी। वेबसाईट को लेकर हमारे बूरे अनुभवों की शुरूवात यहीं से प्रारंभ हो गई। कंपनी को वेबसाईट बनवाने के समय ही हमने बता दिया था कि इस वेबसाईट का प्रारंभ हम बड़े जोर शोर से 15 अगस्त 2012 को करेंगे। निर्धारित दिन के लिए हमने जिला पंचायत की अध्यक्षा सूरज ब्यास कश्यप को अतिथि घोषित कर रखा था लेकिन कंपनी ने 14 अगस्त की देर रात को हमें खाली वेबसाईट हमारे हवाले कर दिया जिसमें निर्धारित तिथि तक हम बिना बताए कुछ भी डालने में असमर्थ रहे और हमारा पूरा कार्यक्रम उनकी वज से पूरी तरह से फ्लाफ रहा। कंपनी ने उसमें फोटो फीचर और विडियो डालने का स्थान तो बना दिया जिसमें से फोटो गैलरी में तो जैसे तैसे फोटो डालना सीख गए पर विडियो गैलरी में विडियो डालना कंपनी ने कभी नहीं सिखाया। जिले में जब एक नाबालिक चोर का मुंडन कर उसको सड़कों पर घुमाया गया और उसके एक्सक्लूजिव विडियो हमारे द्वारा खींच कर उसे डालने के लिए वेबनिर्माता कंपनी को भेजे गए तो उसने यह कहते हुए एक सप्ताह बाद उस विडियो को लौटा दिया कि इसमें वो फार्मेट नहीं डलता जो मूवी मेकर से तैयार होता है। पहले साल हमने इसमें बहुत सारे स्वलिखित लेख डाले जिससे कि उससे संबंधित चीजें सर्च करने पर हमारा वेबसाईट दिखाई पड़े तो इसका नए लूक देने के नाम पर इसका सर्वर बदल दिया गया, बाद में पता चला कि सर्वर बदलने पर एक साल तक हमने इसमें जो भी जानकारी या समाचार डाले थे वो सभी नष्ट हो गए। सर्च इंजनों द्वारा हमारे वेबसाईट की सामाग्री को सर्च नहीं कर पाने के कारण इसमें गिनती के पाठक ही ले देकर पंहुच पाते थे ऐसे में हमने इसे एक विशेष पाठक वर्ग के लोगों के लिए खास तौर से डिजाइन कराने के लिए सोंची तथा उनसे बात करके वेबसाईट के नवीनीकरण और सुधार कार्य का पेमेंट 13 अगस्त 2014 को कर दिया। हमने अपने वेबसाईट का लुक बदलते हुए हमसे जुड़े ऐसे लोगों को एसएमएस किया जो हमारे इस वेबसाईट के बदले हुए लुक के स्थाई पाठक हो सकते थे। एसएमएस से हमने उन्हें पन्द्रह अगस्त 2014 से वेबसाईट के नेटवर्क मार्केटिंग के समाचार विशेष रूप से डाले जाने की जानकारी दी, बदले में उन्होंने हमें सरप्राईज दिया कि हमारा वेबसाईट तो ओपन ही नहीं हो रहा है, फिर हमारा वेबसाईट लगातार चार दिन बंद रहा और वेबनिर्माता कंपनी के चलते दूसरी बार हमारी फजीहत हो गई।
वेबनिर्माता कंपनी के हमसे जुड़े व्यक्ति से लगातार 15 दिनों तक हम हाथ-पैर जोड़ते रहे कि भैया हमने तो आपको 15 दिनों पहले से ही आपके द्वारा बताए गए पेमेंट कर दिए हैं अब तो आप हमारे वेबसाईट को ठीक-ठाक कर दो, पर वो हमारा सुनने को तैयार ही कंहा थे, तब हमने कंपनी की साईट में वहां मेल कर जानकारी दी जहां मेल करने के बाद उनका प्रपोजल आया था, उसके बाद कंपनी ने कुछ सुधार कर फिर अटका दिया, जिसके पच्चीस दिन बीतने के बाद हमने एक बार फिर उन्हें हमारा साईट ठीक करने मेल किया लेकिन 13 अगस्त को उनका भुगतान करने के बाद आज एक माह से कुछ दिन अधिक हो गया है और हमारा वेबसाईट वैसे ही आधा अधूरा पड़ा हुआ है, इसमें के निम्नलिखित काम अब तक अधूरे हैं -
1. होम मिडिल एड तीन में जगह तो बना दी गई है लेकिन अब तक वहां एडमिन के लिए विज्ञापन डालने की जगह नहीं बनाई गई है।
2. होम राईट एड चार और पांच की जगह तो बना दी गई है, लेकिन एडमिन की ओर से उसमें विज्ञापन डल ही नहीं पा रहे हैं।
3. ईमेल सब्सक्रिप्शन जो डाला गया है उसमें लोग अपना ईमेल पता तो डाल सकते हैं लेकिन वह एक्टिव नहीं हुआ है जिसकी वजह से ईमेल डालने वाले किसी भी व्यक्ति के पास समाचार नहीं पंहुचते।

इनके पुराने कार्यो की त्रुटि जो अब तक दूर नहीं हुई है -
1. कमेंट बाक्स में सिर्फ अंग्रेजी में लिखे एक-दो लाईन के कमेंट ही दिखते हैं, अगर आप हिन्दी में कमेंट लिखों तो वह नहीं दिख पाते तथा उनके स्थान पर ?????????? नजर आते हैं वहीं इंग्लिश में किए गए कमेंट भी दो लाईन से ज्यादा हुए तो कुछ कमेंट ही दिखाई पड़ते हैं तथा बाकि कमेंट्स नहीं दिखते।

तो दोस्तों आपको नहीं लगता कि हमने Amorphous Technology Solutions से वेबसाईट निर्माण कराकर अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली, हम तो यही कहेंगे कि आप चाहे काले चोर से वेबसाईट बनवा लेना पर Amorphous Technology Solutions से वेबसाईट मत बनवाना।

मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

छत्तीसगढ़ का पहला ओपिनियन पोल


विधानसभा चुनाव 2013 के लिए

(एनजीओ प्रयास युवा मंच एवं हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान की ओर से आयोजित)
(प्रदेश की जनता का रूख जानने आप अपना बहुमूल्य योगदान अवश्य देवें)
 
नाम  (यदि बताना चाहे तो, आपका नाम गोपनीय रखा जाएगा) ............................................................
 
उम्र .............. साल,                                             
 लिंग - महिला/पुरूष ............................................
 
गांव/शहर ......................................                      
विधानसभा क्षेत्र - ..............................................
 
1. आप अपने क्षेत्र के विधायक के कार्य से -
    (अ) संतुष्ट है,    (ब) असंतुष्ट हैं,               (स) नहीं पता
   उत्तर: ....................................
 
2. आप वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यों से -
   (अ) संतुष्ट है,    (ब) असंतुष्ट हैं,               (स) नहीं पता
   उत्तर: ....................................
 
3. 90 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायक चुने जायेंगे ?
   (अ) 35 से कम,    (ब) 36 से 40,                 (स) 41 से 45
   (द) 46 से 50        (इ) 50 से ज्यादा
   उत्तर: ....................................
 
4. 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के विधायक चुने जायेंगे ?
   (अ) 35 से कम,  (ब) 36 से 40,                (स) 41 से 45
   (द) 46 से 50       (इ) 50 से ज्यादा
   उत्तर: ....................................
 
5. 90 सदस्यीय विधानसभा में अन्य दल के विधायक चुने जायेंगे ?
   (अ) 0,            (ब) 1 से 2,                   (स) 3 से 4
   (द) 5             (इ) 5 से ज्यादा 
   उत्तर: ....................................
 
6. विधानसभा चुनाव 2013 के बाद छत्तीसगढ़ में किसकी सरकार बनेगी ?
   (अ) भाजपा की       (ब) कांग्रेस की              (स) अन्य दल की
   उत्तर: ....................................
 
7. मुख्यमंत्री के रूप में बेहतर कार्य रहा है ?
   (अ) अजीत जोगी का  (ब) डा0 रमन सिंह का    (स) दोनों का  
   (द) किसी का भी नहीं
   उत्तर: ....................................
 
8.  आप छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में किसे देखना पसंद करेंगे ?
   (अ) डा0 रमन सिंह     (ब) अजीत जोगी            (स) दिलीप सिंह जूदेव
   (द) विद्याचरण शुक्ल   (इ) बृजमोहन अग्रवाल    (क) डा0 चरण दास महंत
   (ख) ननकीराम कंवर   (ग) नंदकुमार पटेल        (घ) कोई और (नाम देंवे)
   उत्तर: ....................................
 
 
टीप - ओपिनियन पोल में भाग लेने के लिए इस पेज को डाउनलोड/कापी कर उसे भरकर 31 मई 2013 के पूर्व panchayatkimuskan2012@gmail.com पर ईमेल करें अथवा संपादक, पंचायत की मुस्कान, शिव मंदिर नहर किनारे, जांजगीर के पते पर कोरियर, डाक अथवा अन्य किसी माध्यम से भेज सकते हैं।

बुधवार, 18 जुलाई 2012

काका के जाने से पाकिस्तानियों की पलकें नम और भी...

राजेश खन्ना की शख्सियत सरहदों से परे थी और उनके इस दुनिया से चले जाने के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में यह बात साबित भी हुई. यहां लोगों ने हिंदी सिनेमा में रोमांस के इस बादशाह के इंतकाल पर गम का इजहार किया.
पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने खन्ना के निधन पर जारी अपने शोक संदेश में कहा, ‘राजेश खन्ना एक महान कलाकार थे, जिनका फिल्म और कला के क्षेत्र में योगदान को हमेशा याद किया जाएगा.’ अशरफ ने कहा, ‘राजेश खन्ना की सीमा के पार भी बड़ी संख्या में चाहने वाले थे. लोग उनकी बेहतरीन अदाकारी को बेहद पसंद करते थे.’
यहां के समाचार चैनलों ने भी खन्ना के निधन से जुड़ी खबरें दिखाईं. खन्ना का मुंबई में निधन हो गया. पाकिस्तान के प्रमुख समाचार चैनल ‘जियो न्यूज’ ने खन्ना को श्रद्धांजलि देते हुए करीब एक घंटे का कार्यक्रम प्रसारित किया.
गायक और अभिनेता अली जफर ने टिव्टर पर लिखा, ‘राजेश खन्ना अलविदा. उनकी फिल्मों और गीतों से कई यादें जुड़ी हैं.’ यहां के मशहूर अभिनेता सैयद नूर ने कहा, ‘राजेश खन्ना इस उपमहाद्वीप के इतने बड़े कलाकार थे कि उन्हें लोगों आने वाले कई वर्षों याद रखेंगे.’
अभिनेत्री मीरा ने ट्विटर पर कहा, ‘राजेश खन्ना एक बड़ी शख्सियत थे. यह फिल्म उद्योग के लिए बड़ा नुकसान है.’ पाकिस्तानी मोहम्मद हनीफ और बड़ी संख्या में माइक्रो-ब्लॉगिंग और सोशल नेटवर्किंग वेसाइट के जरिए राजेश खन्ना को याद किया. एक पाकिस्तानी लेखक ने कहा, ‘हिंदी सिनेमा का पहला गाना मुझे ‘ये शाम मस्तानी’ याद हुआ था. यह राजेश खन्ना की फिल्म से था.’

राजेश खन्ना को इन गानों ने बनाया यादगार स्टार

राजेश खन्ना को सुपरहिट बनाने में उनकी अदाकारी ही उनकी फिल्मों के गाने भी अहम थे। संगीतकार आर. डी. बर्मन के संगीत और गायक किशोर कुमार की आवाज ने राजेश खन्ना को बुलंदी पर पहुंचाने में काफी मदद की। बर्मन, किशोर और राजेश खन्ना ने 30 फिल्मों में एक साथ काम किया। 

राजेश खन्ना पर एक से बढ़कर एक गाने फिल्माए गए जो सुपरहिट साबित हुए। राजेश को ज्यादातर रोमांटिक गाने मिले जो हर किसी के दिल में घर कर गए। राजेश की अदाएं इन गानों में देखते ही बनती है। 

आज भी राजेश खन्ना पर फिल्माए गए गाने बड़े शौक से सुने जाते हैं। किशोर कुमार की आवाज राजेश खन्ना पर पूरी तरह फिट बैठती थी। पेश हैं राजेश खन्ना पर फिल्माए गए खास गाने। 

1 मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू (फिल्म - आराधना)

2 रूप तेरा मस्ताना (फिल्म - आराधना)

3 कोरा कागज था ये मन मेरा... (फिल्म - आराधना)

4 'जिंदगी कैसी है पहेली हाय...' (फिल्म - आनंद)

5 मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने... (फिल्म - आनंद)

6 कहीं दूर जब दिन ढल जाए... (फिल्म - आनंद)

7 जय जय शिव शंकर... (फिल्म - आप की कसम)

8 करवटें बदलते रहे सारी रात हम... (फिल्म - आप की कसम)

9 वो शाम कुछ अजीब थी... (फिल्म - खामोशी)

10 यहां वहां सारे जहां में... (फिल्म - आन मिलो सजना)

11 अच्छा तो हम चलते हैं... (फिल्म - आन मिलो सजना)

12 ये जो मोहब्बत है... (फिल्म - कटी पतंग)

13 ये शाम मस्तानी... (फिल्म - कटी पतंग)

14 प्यार दीवाना होता है... (फिल्म - कटी पतंग)

15 जिंदगी का सफर... (फिल्म - सफर)

16 जीवन से भरी तेरी आंखें... (फिल्म - सफर)

17 जिंदगी प्यार का गीत है... (फिल्म - सौतन)

18 शायद मेरी शादी का खयाल... (फिल्म - सौतन)

19 हमें और जीने की चाहत न होती अगर तुम न होते... (अगर तुम न होते)

20 चला जाता हूं... (फिल्म - मेरे जीवन साथी)

21 चिंगारी कोई भड़के... (फिल्म - अमर प्रेम)

22 कुछ तो लोग कहेंगे... (फिल्म - अमर प्रेम)

23 ये क्या हुआ... (फिल्म - अमर प्रेम)

24 दीये जलते हैं... (फिल्म - नमक हराम)

25 मैं शायर बदनाम... (फिल्म - नमक हराम)

26 दिल सच्चा और चेहरा झूठा... (फिल्म - सच्चा झूठा)

27 मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया... (फिल्म - सच्चा झूठा)

28 गोरे रंग पे ना इतना... (फिल्म - रोटी)

29 यार हमारी बात सुनो... (फिल्म - रोटी)

30 हमें तुमसे प्यार कितना... (फिल्म - कुदरत)

31 कभी बेकसी ने मारा... (फिल्म - अलग अलग)

32 मेरे दिल में आज क्या है... (फिल्म - दाग)

33 मेरे नैना सावन भादो... (फिल्म - मेहबूबा)

34 ओ मेरे दिल के चैन... (फिल्म - मेरे जीवन साथी)

35 दीवाना लेके आया है... (फिल्म - मेरे जीवन साथी)

राजेश खन्ना के फोटो से शादी कर ली थी लड़कियों ने

नवभारत टाईम्स की खबर में कहा गया है कि
किसी जमाने में करोडों जवां दिलों की धड़कन रहे हिंदी फिल्मों के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना ने ऐक्टिंग के अलावा फिल्म प्रॉडक्शन और नेता के रूप में भी लोकप्रियता हासिल की।

ऐक्टर के रूप में उनकी लोकप्रियता का यह आलम था कि बड़े-बड़े स्टार उनकी चमक के सामने फीके पड़ गए थे। वह बॉलिवुड के पहले ऐसे ऐक्टर थे, जिन्हें देखने के लिए लोगों की कतारें लग जाती थीं और युवतियां तो अपने खून से उन्हें चिट्ठी लिखा करती थीं। किस्से मशहूर हैं कि कई लड़कियों ने राजेश खन्ना के फोटो से शादी कर ली थी। उन्होंने कुल 163 फिल्मों में काम किया जिनमें 106 फिल्मों में वह हीरो रहे और 22 फिल्मों में उन्होंने को-ऐक्टर की भूमिका अदा की। इसके अलावा उन्होंने 17 शॉर्ट फिल्मों में भी काम किया।

काका के नाम से मशहूर राजेश खन्ना ने बेस्ट ऐक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार तीन बार हासिल किया और 14 बार वह इस अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुए। उन्होंने बेस्ट ऐक्टर के लिए बीएफजेए अवॉर्ड चार बार पाया और 25 बार वह इसके लिए नॉमिनेट किए गए। उन्हें 2005 में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया।

राजेश खन्ना ने अपना फिल्मी सफर 'आखिरी खत' फिल्म से शुरू किया और राज, बहारों के सपने, इत्तेफाक और आराधना जैसी फिल्मों से वह उस मुकाम तक पहुंचे। जहां शायद ही कोई अभिनेता पहुंच पाए। एक खास अदा के साथ पलकें झपकाते हुए मुस्कराकर अपने प्रेम का इजहार करते रोमांटिक हीरो की उनकी छवि के दीवाने आज भी बहुत हैं। कुछ दूसरे अभिनेताओं ने उनकी इस अदा की कॉपी करने की कोशिश की लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

काका के नाम से मशहूर राजेश खन्ना ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार तीन बार हासिल किया और चौदह बार वह इस पुरस्कार के नामांकित हुए। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार चार बार प्राप्त किया और 25 बार वह इसके लिए नामांकित किए गए। उन्हें 2005 में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया।

29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना का असली नाम जतिन खन्ना था। 1966 में उन्होंने पहली बार 24 साल की उम्र में 'आखिरी खत' नामक फिल्म में काम किया था। इसके बाद 'राज', 'बहारों के सपने', 'औरत के रूप' जैसी कई फिल्में उन्होंने की लेकिन उन्हें असली कामयाबी 1969 में 'आराधना' से मिली। इसके बाद एक के बाद एक 14 सुपरहिट फिल्में देकर उन्होंने हिंदी फिल्मों के पहले सुपरस्टार का तमगा अपने नाम किया।
1971 में राजेश खन्ना ने 'कटी पतंग', 'आनन्द', 'आन मिलो सजना', 'महबूब की मेहंदी', 'हाथी मेरे साथी', 'अंदाज' नामक फिल्मों से अपनी कामयाबी का परचम लहराए रखा। बाद के दिनों में 'दो रास्ते', 'दुश्मन', 'बावर्ची', 'मेरे जीवन साथी', 'जोरू का गुलाम', 'अनुराग', 'दाग', 'नमक हराम', 'हमशक्ल' जैसी फिल्में भी कामयाब रहीं। 1980 के बाद राजेश खन्ना का दौर खत्म होने लगा। बाद में वह राजनीति में आए और 1991 में वह नई दिल्ली से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा के लिए चुने गए।
राजेश खन्ना उस मुकाम तक पहुंचे, जहां शायद ही कोई ऐक्टर पहुंच पाए। एक खास अदा के साथ पलकें झपकाते हुए मुस्कुराकर अपने प्रेम का इजहार करते रोमांटिक हीरो की उनकी छवि के दीवाने आज भी बहुत हैं। कुछ दूसरे ऐक्टर्स ने उनकी इस अदा की कॉपी करने की कोशिश की लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

दोबारा जन्‍म हो तो राजेश खन्‍ना ही बनूं, वही गलतियां करूं


राजेश खन्ना की मौत के बाद दैनिक भास्कर ने लिखा है
एक अद्भुत सुपरस्टार....शानदार एक्टर...लाखों दिलों पर राज करने वाला एक ऐसा कलाकार, जिसने किसी फिल्म के हिट होने के मायने ही बदल दिए...गुमनाम सी बीमारी के बाद चला गया...अंतिम समय में डिंपल का हाथ पकड़कर उनकी आंखों में शायद अतीत घूमा होगा...उन गलतियों की याद आई होगी जो अकल्पनीय स्टारडम के दौर में जाने-अनजाने में उनसे हुई होंगी..., असफलताओं का दंश भी चुभा होगा....लेकिन न गलतियों से सीखने की कोई चाहत उनके अंदर थी, न असफलताओं ने उनके अंदर का फौलाद खत्म किया था,...इसलिए तो उनके भीतर का राजेश खन्ना खम ठोंककर कहता है...अगर मुझे दोबारा जन्म मिले तो मैं राजेश खन्ना ही बनना चाहूंगा, वहीं गलतियां फिर से दोहराना चाहूंगा, आनंद रोता नहीं है...उसे आंसुओं से चिढ़ है...बाबू मोशाय....
राजेश खन्ना की फिल्‍मों, गानों के साथ हम दे रहे हैं इस शख्सियत को अपनी आदरांजलि...आप भी अपने श्रद्धांजलि नीचे दिए कमेंट बॉक्स में जाकर दे सकते हैं।
राजेश खन्ना की टॉप फिल्में
सुपरस्टार राजेश खन्ना ने 1966 से 2011 के बीच 160 से ज्‍यादा फिल्मों में काम किया। उनकी कुछ सबसे यादगार फिल्‍में:  बंधन (1969)नरेंद्र बेदी के निर्देशन में बनी 'बंधन'  से राजेश खन्ना ने रुपहले पर्दे पर एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित की। उनके साथ मुमताज ने भी कमाल का अभिनय किया था।  
आराधना (1969)शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी फिल्म 'आराधना' में राजेश खन्ना ने एक पायलट की भूमिका निभाई। पर्दे पर राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर के रोमांस ने कामयाबी की नई कहानी लिखी। फिल्म इतनी कामयाब हुई कि इसे बंगाली में डब भी किया गया और तमिल व तेलुगु में रीमेक भी बने। दोनों ही रीमेक में शर्मिला टैगोर ने ही काम किया था। आनंद (1971)
हृषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी 'आनंद' में राजेश खन्ना ने गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का टाइटल रोल निभाया था। वह मौत से पहले अपनी जिंदगी को खुल कर जीना चाहता है। आनंद के इसी अंदाज के दर्शक दीवाने हो जाते हैं। अमिताभ के साथ की गई राजेश खन्ना की यह फिल्‍म भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई।  बाबर्ची (1972)
हृषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म 'बाबर्ची' में भी राजेश खन्ना टाइटल रोल में थे। उन्‍होंने अपने किरदार से इस फिल्म को भी अमर कर दिया। फिल्म तो सुपरहिट हुई ही। 
अमर प्रेम (1972)शक्ति सामंत निर्देशित इस फिल्म में राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी ने लोगों को अपना दीवाना बना दिया था। सुजीत कुमार और बिंदू ने भी फिल्म में अहम किरदार निभाया था। राजेश खन्ना के बेहद लोकप्रिय डॉयलाग- 'पुष्पा...आई हेट टियर्स' इसी फिल्म से है। 'अमर प्रेम' बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शुमार किया जाता है। फिल्म में राजेश खन्ना के रोल को न सिर्फ दर्शकों ने पसंद किया था बल्कि उनकी अदाकारी के चर्चों से अखबार और फिल्मी पत्रिकाएं भी भर गई थीं।  
आविष्कार (1974)बसु भट्टाचार्य निर्देशित इस फिल्म में एक बार फिर राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी दिखी। फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसे भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ क्लासिक फिल्मों में शुमार किया जाता है।  
आप की कसम (1974)ओम प्रकाश निर्देशित इस फिल्म में राजेश खन्ना ने मुमताज के शक्की पति का किरदार निभाया था। संजीव कुमार ने राजेश खन्ना के दोस्त का किरदार किया था। यह भी ब्लॉकबस्टर ही साबित हुई।  
  टॉप 10 गाने...राजेश खन्ना को पर्दे पर उनके गीतों के लिए भी याद किया जाएगा। बॉलीवुड के कई अमर गीत उनपर ही फिल्माए गए। यहां एक क्लिक में देखिए राजेश खन्ना के दस टॉप गीत। 1976-1978 तक बॉक्स ऑफिस पर रहे फ्लॉप
1976 से 1978 के बीच राजेश खन्ना की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। इस दौरान उनके अभिनय की तो तारीफ हुई लेकिन फिल्में कमाल नहीं कर सकी। राजेश खन्ना की फिल्म  'बंडलबाज' (1976) बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 25 लाख रुपए ही कमा सकी। इसके बाद आई 'महबूबा' ने भी 25 लाख रुपए का ही कारोबार किया। 1977 में आई 'अनुरोध' और 'कर्म' भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर सकी। राजेश खन्ना ने इसके बाद फिल्म 'छैला बाबू' की लेकिन वो भी उनके जादू को वापस नहीं ला सकी। 'अमर दीप' से राजेश खन्ना ने एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर वापसी की। (सुनिए 1987 में बीबीसी द्वारा लिया गया राजेश खन्‍ना का इंटरव्यू) पर्दे पर काका के साथ हिट जोड़ीराजेश इंडस्ट्री में हमेशा ही एक जिंदादिल रोमैंटिक हीरो के रूप में याद किए जाएंगे। फिल्मों में राजेश की एक नहीं, बल्कि कई हीरोइनों के साथ हिट जो़ड़ियांबनीं थीं।  टॉप डॉयलाग और सीन 
राजेश खन्ना तो चले गए लेकिन उनकी अदाकारी और डॉयलाग बोलने का एक खास अंदाज हमेशा जिंदा रहेगा। राजेश खन्ना की अदाओं के साथ-साथ उनके डॉयलाग्स भी लोगों के दिलों दिमाग पर छा जाते थे। 

राजेश खन्ना की जिंदगी का सफर

नवभारत टाईम्स की खबर में कहा गया है कि

राजेश खन्ना को ऐसे ही सुपर स्टार नहीं कहा जाता था। लोग इस कदर उनके दीवाने थे कि बाजारों में युवतियां पागलों की तरह उनकी कार को चूमती थीं और कार पर लिपस्टिक के दाग ही दाग होते थे। युवतियां उन्हें अपने खून से लिखे खत भेजा करती थीं। राज कपूर और दिलीप कुमार के लिए भी लोग पागल रहते थे, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि जो दीवानगी राजेश खन्ना के लिए थी, वैसी पहले या बाद में कभी नहीं दिखी।

जतिन बन गया राजेश 
29 दिसंबर, 1942 को अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना की परवरिश उनके दत्तक माता-पिता ने की। उनका नाम पहले जतिन खन्ना था। स्कूली दिनों से ही उनका झुकाव अभिनय की ओर था और उन्होंने कई नाटकों में ऐक्टिंग की। सपनों के पंख लगने की उम्र आई, तो उन्होंने फिल्मों की राह पकड़ने का फैसला किया। यह दौर उनकी जिंदगी की नई इबारत लिखकर लाया और उनके चाचा ने उनका नाम जतिन से बदलकर राजेश कर दिया। इस नाम ने न केवल उन्हें शोहरत दी, बल्कि यह नाम हर युवक और युवती के जेहन में अमर हो गया।

आया 'काका' का दौर 
1965 में राजेश खन्ना ने यूनाइटेड प्रड्यूर्स ऐंड फिल्मफेयर के प्रतिभा खोज अभियान में बाजी मारी। उनकी पहली फिल्म चेतन आनंद निर्देशित 'आखिरी खत' थी। दूसरी फिल्म मिली 'राज' भी प्रतियोगिता जीतने का ही पुरस्कार थी। उस दौर में दिलीप कुमार और राज कपूर के अभिनय का डंका बजता था, किसी को अहसास भी नहीं था कि एक 'नया सितारा' शोहरत की बुलंदियां छूने के लिए बढ़ रहा है। राजेश खन्ना ने 'बहारों के सपने', 'औरत', 'डोली' और 'इत्तेफाक' जैसी शुरुआती सफल फिल्में दीं, लेकिन 1969 में आई 'आराधना' ने बॉलिवुड में 'काका' के दौर की शुरुआत कर दी। 'आराधना' में राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी ने सिल्वर स्क्रीन पर रोमांस और जज्बातों का ऐसा चित्रण किया कि युवतियों की रातों की नींद उड़ने लगी और 'काका' प्रेम का नया प्रतीक बन गए।

किशोर बन गए आवाज
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आराधना' से किशोर कुमार जैसे गायक को भी बॉलिवुड में स्थापित होने का मौका मिला और फिर वह राजेश खन्ना के गीतों की आवाज बन गए। अदाकारी और आवाज की इस जुगलबंदी ने बॉलिवुड को 'मेरे सपनों की रानी', 'रूप तेरा मस्ताना', 'कुछ तो लोग कहेंगे', 'जय जय शिवशंकर' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' जैसे कालजयी गाने दिए। 'आराधना' और 'हाथी मेरे साथी' ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे रेकॉर्ड तोड़ दिए। उन्होंने 163 फिल्मों में काम किया, जिनमें 106 फिल्मों को उन्होंने सिर्फ अपने दम पर सफलता दिलाई, 22 फिल्मों में उनके साथ उनकी टक्कर के अन्य नायक भी थे।

आज तक नहीं टूटा रेकॉर्ड 
राजेश खन्ना ने 1969 से 1972 के बीच लगातार 15 सुपरहिट फिल्में दीं। इस रेकॉर्ड को आज तककोई नहीं तोड़ पाया, इसके बाद बॉलिवुड में 'सुपरस्टार' का आगाज हुआ। उन्हें तीन बार सर्वश्रेष्ठअभिनेता के फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया। इस पुरस्कार के लिए उनका 14 बार नामांकनहुआ। उन्हें 2005 में 'फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट' अवॉर्ड दिया गया। रोमांटिक छवि केबावजूद उन्होंने विविधतापूर्ण रोल किए, जिनमें लाइलाज बीमारी से जूझता आनंद, 'बावर्ची' काखानसामा, 'अमर प्रेम' का अकेला पति और 'खामोशी' के मानसिक रोगी की भूमिका थी। बॉलिवुडका यह स्वर्णिम दौर था और राजेश खन्ना की अदाकारी के लिए यह सोने पर सुहागा साबित हुआऔर उन्हें अपने समय के कला पारखियों के साथ काम करने का मौका मिला।

एक से एक हिट फिल्में
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अमर प्रेम' और 'आप की कसम' जैसी फिल्मों में राजेश खन्ना की शर्मिला टैगोर और मुमताज केसाथ ऐसी 'केमेस्ट्री' बनी कि इन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी प्रतिभा को शक्ति सामंत, यशचोपड़ा, मनमोहन देसाई, ऋषिकेश मुखर्जी, रमेश सिप्पी ने और निखारा। आर. डी. बर्मन औरकिशोर कुमार के साथ उन्होंने 30 से अधिक फिल्मों में काम किया। राजेश खन्ना की फिल्में1976-78 के दौरान पहले सी सफलता हासिल नहीं कर पाईं। 1978 के बाद उन्होंने 'फिर वही रात', 'दर्द', 'धनवान', 'अवतार' और 'अगर तुम ना होते' जैसी फिल्में कीं, जो कमाई के लिहाज से सफलनहीं थीं, लेकिन आलोचकों ने जरूर सराहा।

सुपरस्टार के सुपर अफेयर 
उनके व्यक्तित्व ने न केवल प्रशंसकों को दीवाना बनाया, बल्कि सुनहरे दिनों में अभिनेत्रियों पर भीउनका जादू चला। 70 के दशक में पहले उनका अंजू महेंद्रू के साथ अफेयर चला, फिर 1973 मेंउन्होंने अपने से 15 साल छोटी डिंपल कपाडि़या से शादी कर ली। उनकी दो बेटियां ट्विंकल औररिंकी हैं, डिंपल कपाडि़या 1984 में राजेश खन्ना से अलग हो गईं। हालांकि, उन्होंने कभीऔपचारिक रूप से तलाक नहीं लिया। राजेश खन्ना का नाम 'सौतन' की नायिका टीना मुनीम सेभी जुड़ा। इस जोड़ी ने 'फिफ्टी फिफ्टी', 'बेवफाई', 'सुराग', 'इंसाफ मैं करूंगा' तथा 'अधिकार' जैसीफिल्में दीं।

सांसद राजेश खन्ना 
1992 से लेकर 1996 तक राजेश खन्ना लोकसभा के सदस्य रहे। वह कांग्रेस के टिकट पर नईदिल्ली सीट से जीते थे। जब वह सांसद थे, तो उन्होंने अपना पूरा समय राजनीति को दिया औरअभिनय की पेशकशों को ठुकरा दिया। उन्होंने वर्ष 2012 के आम चुनाव में भी पंजाब में कांग्रेस केलिए चुनाव प्रचार किया था।

'काका और किशोर दो जिस्म एक जान थे'

राजेश खन्ना से जुड़ी यादों को साझा करते हुए नवभारत टाईम्स ने लिखा है

लीना चंदावरकर 
किशोरजी (किशोर कुमार-लीना चंदावरकर के पति) जल्दी से किसी से सोशलाइज नहीं होते थे, लेकिन काका के साथ उनका दो जिस्म और एक जान का रिश्ता था। काका अक्सर हमारे घर पर आते थे और किशोरजी के साथ बहुत मजाक मस्ती करते रहते थे।

अमित (किशोर के बेटे) से भी उनका बहुत लगाव था। किशोरजी भी अक्सर कहते थे कि मुझे यह लगता ही नहीं कि मैं किसी और को अपनी आवाज दे रहा हूं। मुझे यही लगता है कि मैं खुद गा रहा हूं। किशोरजी के कई कालजयी गाने काका के हिस्से आए थे। वहीं काका भी यही कहते थे कि 'किशोर दा की आवाज तो मेरी ही आवाज है।'

मैंने भी काका के साथ कुछ फिल्मों में काम किया है। वे बहुत अच्छे को-स्टार रहे हैं। सेट पर वे हमेशा फुल ऑफ लाइफ और एनर्जी रहते थे। उनके साथ आल टाइम फेवरिट 'महबूब की मेहंदी' फिल्म में काम किया। उनके साथ मेरी आखिरी फिल्म थी 'ममता की छांव'। जब किशोरदा की मौत हुई तो काका घर पर आए और बच्चों की तरह उनकी तस्वीर के सामने फूट-फूट कर रोने लगे। उनकी तस्वीर से बातें करने लगे कि आपको इस तरह नहीं जाना चाहिए था। काका की बातों और उनके स्वभाव में बनावट बिलुकल नहीं थी। वे एक जिंदादिल इंसान और सच्चे सुपरस्टार के तौर पर हमेशा याद किए जाएंगे।


खाने-पीने के शौकीन थे काकाः आशा पारीख
मैंने उनके साथ बहुत सी हिट फिल्में दी हैं। उनकी स्टारडम के जलवे अपनी आंखों से देखे हैं। किस तरह लड़कियां उनके प्यार में पागल रहती थीं। वे बहुत ही जॉविअल इंसान थे। यही नहीं, उन्हें खाने-पीने का भी बहुत शौक था। डायटिंग करने वाले लोगों को तो वे खास तौर पर कहते कि 'खा लो, खा लो। वरना जब डॉक्टर कहेंगे तब खाओगे!'

जब भी वे फिल्म के सेट पर आते तो उनके लिए मिठाई का इंतजाम होना बहुत जरूरी था। वे मिठाई जरूर खाते थे। अगर कभी-कभी उन्हें मिठाई नहीं मिल पाती तो वे काफी अपसेट भी हो जाते थे। काका को सिर्फ खाने का ही नहीं, खाना बनाने का भी शौक था। अपने कुकिंग के शौक के बारे में वे अक्सर हमसे बातें किया करते थे और रेसिपीज भी शेअर अरते थे। उनका स्वभाव बहुत अच्छा था। सेट पर वे कभी किसी को बोर नहीं होने देते। हमेशा हंसते-हंसाते रहना ही उनका काम था। लेकिन इसके साथ ही वे अपने काम को लेकर भी बहुत डेडिकेटेड थे।
प्रस्तुति: रीना पारीक