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बुधवार, 18 जुलाई 2012

बॉलीवुड का पहला सुपर सितारा राजेश खन्ना


राजेश खन्ना के संबंध में आपकी सहेली में लिखा है
हिन्दी सिनेमा के महानतम् सितारों में कभी भी शुमार नहीं किए गए राजेश खन्ना ने एक वक्त ऎसा देखा जब उनके बिना किसी फिल्म की कल्पना करना भी बेमानी सा था। सत्तर के दशक में राजेश खन्ना ने जो सफलता हासिल की उसकी तुलना आज के किसी भी सफल नायक से नहीं की जा सकती है।राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार हैं। उन्होंने अभिनय में अपने करियर की शुरूआत 1966 में चेतन आनन्द की फिल्म आखिरी खत से शुरू की थी। जिस तरह से आज टीवी के जरिये टैलेंट हंट किया जाता है, कुछ इसी तरह काम 1965 में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर ने किया था। वे नया हीरो खोज रहे थे। फाइनल में दस हजार में से आठ लडके चुने गए थे, जिनमें एक राजेश खन्ना भी थे। अंत में राजेश खन्ना विजेता घोषित किए गए।

राजेश खन्ना का वास्तविक नाम जतिन खन्ना है। फिल्म उद्योग ने उन्हें नया नाम दिया राजेश खन्ना। चेतन आनन्द की आखिरी खत ने राजेश खन्ना को हिन्दी फिल्मों में अपना स्थान बनाने में मदद की। 1969 से 1975 के बीच राजेश ने कई सुपरहिट फिल्में दीं। उस दौर में पैदा हुए ज्यादातर लडकों के नाम राजेश रखे गए। फिल्म इंडस्ट्री में राजेश को प्यार से काका कहा जाता है। जब वे सुपरस्टार थे तब एक कहावत बडी मशहूर थी- ऊपर आका और नीचे काका। राजेश खन्ना स्कूल और कॉलेज जमाने से ही एक्टिंग की ओर आकर्षित हुए। उन्हें उनके एक नजदीकी रिश्तेदार ने गोद लिया था और बहुत ही लाड-प्यार से उन्हें पाला गया। राजेश खन्ना ने फिल्म में काम पाने के लिए निर्माताओं के दफ्तर के चक्कर लगाए। स्ट्रगलर होने के बावजूद वे इतनी महंगी कार में निर्माताओं के यहां जाते थे कि उस दौर के हीरो के पास भी वैसी कार नहीं थी।

प्रतियोगिता जीतते ही राजेश का संघर्ष खत्म हुआ। सबसे पहले उन्हें "राज" फिल्म के लिए जीपी सिप्पी ने साइन किया, जिसमें बबीता जैसी बडी स्टार थीं। लेकिन उनकी पहली प्रदर्शित फिल्म आखिरी खत थी। अपने रूमानी अंदाज, स्वाभाविक अभिनय और कामयाब फिल्मों के लंबे सिलसिले के बल पर करीब डेढ दशक तक सिने प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले राजेश खन्ना के रूप में हिंदी सिनेमा को पहला ऎसा सुपरस्टार मिला जिसका जादू चाहने वालों के सिर चढकर बोलता था। 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में जन्मे जतिन खन्ना बाद में फिल्मी दुनिया में राजेश खन्ना के नाम से मशहूर हुए। उनका अभिनय करियर शुरूआती नाकामियों के बाद इतनी तेजी से परवान चढा कि उसकी मिसाल बहुत कम ही मिलती है। परिवार की मर्जी के खिलाफ अभिनय को बतौर करियर चुनने वाले राजेश खन्ना ने वर्ष 1966 में 24 बरस की उम्र में आखिरी खत फिल्म से सिनेमा जगत में कदम रखा था।

बाद में राज, बहारों के सपने और औरत के रूप में उनकी कई फिल्में आई। मगर उन्हें बॉक्स आफिस पर कामयाबी नहीं मिल सकी। लेकिन इन तीन वर्षो में राजेश खन्ना ने अपने अभिनय से कुछ ऎसे निर्माताओं को प्रभावित करने में सफलता पाई जो उन दिनों हिन्दी सिनेमा के प्रमुख कर्ताधर्ताओं में शामिल होते थे। ऎसे ही एक निर्माता थे शक्ति सामन्त। शक्ति सामन्त अपने समय में अशोक कुमार, मनोज कुमार, देवआनन्द इत्यादि के साथ काम कर चुके थे और बॉलीवुड के सफलतम निर्माता निर्देशकों में उनका शुमार होता था। 1969 में उन्होंने राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर को एक साथ लेकर एक रोमांटिक प्रेम कहानी बनाई। इस फिल्म में उन्होंने राजेश खन्ना को पहली बार दोहरी भूमिका में पेश किया। आराधना ने राजेश खन्ना के करियर को उडान दी और देखते ही देखते वह युवा दिलों की धडकन बन गए। 

आराधना ने राजेश खन्ना की किस्मत के दरवाजे खोल दिए और उसके बाद उन्होंने अगले चार साल के दौरान लगातार 15 हिट फिल्में देकर समकालीन तथा अगली पीढी के अभिनेताओं के लिए मील का पत्थर कायम किया। वर्ष 1970 में बनी फिल्म सच्चा झूठा के लिए उन्हें पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया। वर्ष 1971 राजेश खन्ना के अभिनय करियर का सबसे यादगार साल रहा।उस वर्ष उन्होंने कटी पतंग, आनन्द, आन मिलो सजना, महबूब की मेंहदी, हाथी मेरे साथी और अंदाज जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। भावपूर्ण दृश्यों में राजेश खन्ना के सटीक अभिनय को आज भी याद किया जाता है। आनन्द फिल्म में उनके सशक्त अभिनय को एक उदाहरण का दर्जा हासिल है। एक लाइलाज बीमारी से पीडित व्यक्ति के किरदार को राजेश खन्ना ने एक जिंदादिल इंसान के रूप जीकर कालजयी बना दिया। राजेश खन्ना को आनन्द में यादगार अभिनय के लिये वर्ष 1971 में लगातार दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया।

अपनी लगातार सुपर सफलता से राजेश खन्ना ने जहां आम जनता का दिल जीतने में सफलता पाई वहीं उन्होंने बासु भट्टाचार्य के निर्देशन में बनी फिल्म आविष्कार के जरिए उन्होंने उस वर्ग के दर्शकों को भी अपना दीवाना बनाने में सफलता प्राप्त की जो फार्मूला फिल्मों से इतर बनी फिल्मों को पसन्द करते थे। उन्हें आविष्कार फिल्म के लिए भी फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किया था। यह उनके करियर का अन्तिम फिल्मफेयर पुरस्कार था। इसके 31 वर्ष बाद उन्हें साल 2005 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया था। राजेश खन्ना ने अनेक अभिनेत्रियों के साथ काम किया, लेकिन शर्मिला टैगोर और मुमताज के साथ उनकी जोडी खासतौर पर लोकप्रिय हुई। उन्होंने शर्मिला के साथ आराधना, सफर, बदनाम, फरिश्ते, छोटी बहू, अमर प्रेम, राजा रानी और आविष्कार में जोडी बनाई, जबकि दो रास्ते, बंधन, सच्चा झूठा, दुश्मन, अपना देश, आपकी कसम, रोटी तथा प्रेम कहानी में मुमताज के साथ उनकी जोडी बहुत पसंद की गई। आराधना फिल्म का गाना "मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू..." उनके करियर का सबसे बडा हिट गीत रहा। राजेश खन्ना की सफलता के पीछे संगीतकार आरडी बर्मन और गायक किशोर का अहम योगदान रहा है।

इनके बनाए और राजेश पर फिल्माए अधिकांश गीत हिट साबित हुए और आज भी सुने जाते हैं। किशोर ने 91 फिल्मों में राजेश को आवाज दी तो आरडी ने उनकी 40 फिल्मों में संगीत दिया। राजेश खन्ना ने वर्ष 1973 में खुद से उम्र में काफी छोटी नवोदित अभिनेत्री डिम्पल कपाडिया से विवाह किया और वे दो बेटियों टि्वंकल और रिंकी के माता-पिता बने। हालांकि राजेश और डिम्पल का वैवाहिक जीवन ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका और कुछ समय के बाद वे अलग हो गए। बाद में उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और वर्ष 1991 से 1996 के बीच नई दिल्ली से कांग्रेस के लोकसभा सांसद भी रहे। वर्ष 1994 में उन्होंने अभिनय की नई पारी शुरू की। उसके बाद उनकी आ अब लौट चलें (1999), क्या दिल ने कहा (2002), जाना (2006) और वफा (2008) में उन्होंने अभिनय किया। फिलहाल उन्हें टीवी पर हावेल्स फैन के विज्ञापन में देखा जा रहा है। इस विज्ञापन का निर्देशन आर.बल्की ने किया है।

राजेश खन्ना की फिल्मों से सीखा अभिनय: सुनील शेट्टी


 राजेश खन्ना से जुड़ी यादों को साझा करते हुए आनलाईन हिन्दी ने लिखा है
                                फिल्म जगत के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना के निधन से पूरा बॉलीबुड शोक में डूबा है। जब इन महान हस्ती ने दुनिया से विदा ली उस समय फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी राजधानी लखनऊ में थे। उन्होंने कहा कि राजेश खन्ना उनके आर्दश रहे हैं और वे उनकी फिल्में देखकर बड़े हुए हैं।
बालीवुड स्टार सुनील शेट्टी ने राजेश खन्ना के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुये कहा कि रूपहले पर्दे का यह सितारा अस्त होने के बाद भी अभिनय की दुनिया में कलाकारों के लिये प्रेरणा का श्रोत बना रहेगा। अपनी नई फिल्म 'पिक्चर अभी बाकी है' के प्रमोशन के सिलसिले में नवाब नगरी आये सुनील शेट्टी ने कहा कि श्री खन्ना के निधन से मै स्तब्ध हूं, वह मेरे आदर्श थे। मैं उनकी फिल्में देखकर बड़ा हुआ हूं और उनकी फिल्मों से अभिनय की बारीकियों को सीखा हूं।
उन्होंने कहा कि राजेश खन्ना का निधन फिल्म जगत के लिए तो क्षति है साथ ही यह मेरे लिये बहुत बडा आघात है। सुनील ने कहा कि श्री खन्ना जैसे अभिनेता रोज-रोज जन्म नहीं लेते उन्होंने बॉलीवुड को जो दिया उसे भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि अभिनेता दारा सिंह की मृत्यु के एक सप्ताह के भीतर श्री खन्ना की मृत्यु से फिल्म जगत शोक के समंदर में समा गया है। सत्तर के दशक के महानायक की क्षतिपूर्ति करना बालीवुड के लिये लगभग असंभव है। वहीं यहां मौजूद हास्य अभिनेता राजपाल यादव ने भी राजेश खन्ना के निधन पर दुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि श्री खन्ना जैसे महान कलाकार के सदियों में एक बार संसार में अवतरित होते है। उनकी भरपाई फिल्मी दुनिया में कभी नही हो सकेगी।

... और लड़कियों और महिलाओं से घिर गए राजेश खन्ना!


राजेश खन्ना से जुड़ी यादों को साझा करते हुए दैनिक भास्कर ने लिखा है
जोधपुर. 1998 का फरवरी माह। मौसम चुनाव का था। बीते जमाने के सुपर स्टार राजेश खन्ना यहां एक सभा को संबोधित करने आए थे। जहां वे ठहरे थे, वहां महिलाओं, युवतियों और बच्चियों ने उन्हें घेर लिया। 

जिस सुपर स्टार राजेश खन्ना की एक झलक देखना किसी जमाने में उनका सपना रहा हो, उन्हें अपने बीच पाकर हर चेहरे पर गजब की खुशी छाई थी। अपनी प्रशंसकों की डिमांड पर खन्ना ने अदाकारी भी दिखाई और खुलकर बातें भी कीं। 

राजेश खन्ना को इतनी पसंद आई ठेले वाली चाय कि एक और पीने के बाद...!



राजेश खन्ना से जुड़ी यादों को साझा करते हुए दैनिक भास्कर ने लिखा है                       
                             हिन्दी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना बुधवार को हम सबको छोड़कर चले गए। ‘अच्छा तो हम चलते है’, हमें और जीने की चाहत ना होती अगर तुम ना होते, मेरे नैना सावन भादो’ जैसे सुपरहिट गाने गुनगुनाते उनके फैन्स ने आंसुओं के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी। ‘जिंदगी प्यार का गीत है’ से काका ने सभी को हंसते गाते मुस्कराते जीना सिखाया, पर खुद ‘जै जै शिव शंकर’ के पास यही कहते हुए लीन हो गए कि ‘चला जाता हूं किसी की धुन में धड़कते दिल के तराने लिए’। उनके फैन्स से सिटी रिपोर्टर ने उनसे जुड़ी यादों को शेअर किया।

जयपुरवासियों के रहे दिल के करीब

ये लाल रंग, कब मुझे छोड़ेगा

वर्ष 1974 में बांद्रा के महबूब स्टूडियो में फिल्म ‘प्रेम नगर’ का गीत ‘ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा’ किशोर कुमार की आवाज में टेप हो रहा था। काका लीड रोल में होने से उन्हें फाइनल टेप सुनने को बुलाया गया। उस समय उन्होंने किशोर के भावों की तारीफ करते हुए अंत की पंक्तियों को दुबारा टेप करने को कहा था। काका ने कहा कि नशा और गम दोनों मुझे गिरा दें ऐसा फील चाहिए। यह कहना है जयपुर के सिंगर चन्द्र कटारिया का।

जयपुर में फिल्म धर्मकांटा

सुल्तान अहमद के निर्देशन में 1980-81 में जब वे फिल्म ’धर्म कांटा’ की शूटिंग पर राजकुमार, वहीदा रहमान, जीतेन्द्र के साथ जयपुर आए तो उन्होंने होटल क्लार्क्‍स आमेर में मुझसे (राज बंसल) आधे घंटे तक बात की। उन्होंने कहा था कि सफल होने के लिए सही सोच और सही मार्ग चुनना होता है। जिंदगी कांटों की तरह है। इसे फूल बनाने की कोशिश करो।

अच्छे दोस्त थे मेरे

फिल्म वितरक नारायण दास माखीजा कहते हैं कि खन्ना साहब मेरे अच्छे दोस्त थे। जब भी जयपुर आते तो मेरे घर जरूर आते और घंटों बातें करते थे। उनका स्वभाव ऐसा था कि प्यार करने वालों को खूब प्यार और घृणा करने वाले को देखना तक पसंद नहीं करते थे। वर्ष 1967 में नासिर हुसैन निर्देशित ‘बहारों के सपने’ फिल्म के दौरान उनसे मिला था।

हर सिनेमाघर में उनकी ही फिल्म

एक दौर था, जब शहर के हर सिनेमा घर में उनकी फिल्में ही परदे पर होती थीं। यह कहना है वरिष्ठ नाट्य निर्देशक साबिर खान का। वे कहते हैं वर्ष 1969 में ‘आराधना’, ‘इत्तफाक’, ‘बंधन’, ‘दो रास्ते’ सिनेमाघरों में रहीं। वहीं 1971 में ‘कटी पतंग’, ‘आनंद’, ‘आन मिलो सजना’, ‘अंदाज’, ‘मर्यादा’, ‘छोटी बहू’, ‘हाथी मेरे साथी’, ‘गुड्डी’, ‘महबूब की मेहंदी’, ‘बदनाम फरिश्ते’ रिलीज हुईं। उस समय लड़के उनकी जैसे हेयर स्टाइल रखने लगे थे।

मैं तो आपकी प्रतिध्वनि हूं

आरयू ड्रामा डिपार्टमेंट की हैड अर्चना श्रीवास्तव कहती हैं कि 1989 में जब मैं एनएसडी दिल्ली में थी, तब कनॉट पैलेस पर उनसे शूटिंग के दौरान मुलाकात हुई। उन्होंने एनएसडी स्टूडेंट के बारे में सुना तो कहा ‘राजस्थान का नाम ऊंचा करना बेटा।’ मैंने उनसे पूछा, सर आप परदे पर बड़े रंगीले और दूसरों को कुछ नहीं समझने वाले दिखते हो, पर यहां ऐसा नहीं है। इस पर उन्होंने कहा ‘मैं तो इंसान हूं, आपकी प्रतिध्वनि हूं, बस कर्म कर आगे बढ़ रहा हूं।’

जब मिला दादा फाल्के पुरस्कार

जनवरी, 2009 में पिताजी ओपी बंसल को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलना था, लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से वे नहीं जा सके। मां और मैं पुरस्कार लेने गए तो राजेश खन्ना ने ही उन्हें पुरस्कृत करते हुए पूछा- बंसल साहब नहीं आए क्या? जब उन्हें तबीयत खराब होने के बारे में बताया तो काका ने सभागार में पिताजी के साथ संबंधों के बारे में प्रशंसा की। यह कहना है फिल्म वितरक सुनील बंसल का।


.वो ठेले वाली चाय और मैं

सुपरस्टार क्या होता है? यह राजेश खन्ना अच्छी तरह जानते थे। उनसे मेरी (अरुण किम्मतकर) मुलाकात ‘धर्मकांटा’ की शूटिंग के दौरान हुई। एक दिन उनके साथ गाड़ी में शूटिंग स्पॉट तक गया। उस दौरान उन्होंने गलता रोड पर एक ठेले के पास गाड़ी रुकवाकर कड़क चाय पीने को कहा। चाय इतनी पसंद आई कि उन्होंने दुबारा पी। फिर गाड़ी से उतरकर चाय वाले को 500 रु. दिए। चाय वाले ने मना कर दिया, तो भी उन्होंने उसकी जेब में डाल दिए।

जयपुर में रही हिट फिल्में

वर्ष 1969 में ‘दो रास्ते’, 1970 में ‘सच्चा झूठा’, ‘आराधना’, 1971 में ‘कटी पतंग’, ‘हाथी मेरे साथी’, 1972 में ‘अमर प्रेम’, 1974 में ‘आपकी कसम’, ‘रोटी’ सहित कई और फिल्मों ने शहर में सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन मनाया।

आंसू पोंछते हुए अमिताभ ने छुए राजेश खन्‍ना के पांव

राजेश खन्ना की मौत के बाद  अमिताभ बच्चन  के बारे में दैनिक भास्कर ने लिखा है -
मुंबई। महानायक अमिताभ बच्चन बुधवार को राजेश खन्‍ना के बंगले (आशीर्वाद) पर पहुंचे तो उनकी आंखें नम हो गईं। उन्‍होंने अक्षय कुमार को कस कर गले लगाया। फिर हाथ जोड़े, सिर झुकाते हुए डिंपल की ओर बढ़े और उन्हें ढांढस बंधाया। 
अमिताभ बच्चन जब राजेश खन्‍ना के मृत शरीर की ओर बढ़े तो उनकी आंखों में आंसू भर आए।उन्‍होंने अपनी भीगी आंखों से चश्मा उतारा और काका के पैर छुए। बिग बी को भावुक होता देख अभिषेक बच्चन उनकी ओर बढ़े और फिर उन्हें संभाला।
इसके बाद अमिताभ 'काका' के पास ही बैठ गए और उनके आखिरी वक्‍त के बारे में पूछा। सूत्रों के मुताबिक बिग बी ने यह भी पूछा कि किस वक्त काका ने अंतिम सांस ली और उस वक्त कौन-कौन उनके पास था। 
गुजरे जमाने के सुपर स्‍टार राजेश खन्‍ना के निधन की खबर बुधवार दोपहर सार्वजनिक हुई। वह महीनों से बीमार थे। सोमवार को ही उन्‍हें लीलावती अस्‍पताल से छुट्टी मिली थी। लेकिन बुधवार को उनकी तबीयत फिर से ज्‍यादा बिगड़ गई और अंतत: वह हमसे जुदा हो गए। शाहरुख खान, सलमान खान, कैटरीना कैफ और बॉलीवुड की कई अन्य नामचीन हस्तियां काका के दर्शन करने आशीर्वाद पहुंचे।  गुरुवार को 11 बजे उनका अंतिम संस्कार होगा। 

रेतीली धरती से भी 'काका' का नाता,

राजेश खन्ना के सफर के बारे में दैनिक भास्कर ने लिखा है -

जोधपुर.बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना (काका) अपने पूरे फिल्मी कॅरियर के दौरान दो बार सूर्यनगरी आए। 15 सितंबर 1986 को नसरानी सिनेमा का उदघाटन करने जोधपुर आए। राजेश खन्ना का सिनेमा के मालिक भूरे खां नसरानी ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

चुनावी सभा में दिखाया फिल्मी अंदाज

लोकसभा प्रत्याशी अशोक गहलोत के समर्थन में रावण का चबूतरा मैदान में 13 फरवरी 1998 को चुनावी सभा को संबोधित करते हुए फिल्म अभिनेता राजेश खन्ना फिल्मी स्टाइल में भाजपा पर बरस पड़ें। सभा में विलंब से पहुंचते ही राजेश खन्ना ने इस शेर के साथ संबोधन शुरू किया ‘जख्म पत्ता- पत्ता है, दर्द डाली डाली हैं, ऐ चमन इतना बता तेरा कौन माली हैं’।

चुनावी सभा में काका ने कहा कि ‘हम काम के नाम पर, वे राम के नाम पर वोट मांगते हैं’ ‘ये कहते हैं भगवान राम को छत देंगे, राम तो सभी को छत देते हैं, राम को सड़क पर नहीं बेचते। उन्होंने ‘रोटी’ फिल्म के मशहूर गाने की लाइन ‘ये जो पब्लिक हैं, ये सब जानती हैं, अंदर क्या है, बाहर क्या हैं’ सभा के दौरान राजेश खन्ना ने अशोक गहलोत को जिताने की अपील की।

एक ही घर में चार पीढ़ियां देखकर खुश हुए

कांग्रेसी नेता जवाहर सुराणा ने बताया कि अशोक गहलोत (वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री) के समर्थन में 13 फरवरी 1998 को रावण का चबूतरा मैदान में चुनावी सभा को संबोधित करने जोधपुर आए थे। सभा समाप्त होने के बाद शाम करीब 7 बजे राजेश खन्ना उनके घर शास्त्रीनगर स्थित ई- 10 पर पिता लक्ष्मीचंद सुराणा के साथ आए। उन्होंने यहां पिता लक्ष्मीचंद सुराणा, (बेटे) जवाहर, (पोता) ललित और (पड़पौत्र)धवल एक साथ चार पीढ़ियों के संयुक्त परिवार को देखा तो उनका चेहरा खिल उठा।

गायक मन्ना डे को बहुत याद आए राजेश खन्ना


राजेश खन्ना की मौत के बाद अमर उजाला लिखता है कि -
                            राजेश खन्ना के निधन पर शोक जताते हुए महान गायक मन्ना डे ने बुधवार को कहा कि बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार के लिए गाना उनके लिए सम्मान की बात थी।

मन्ना ने कहा, "वह एक महान कलाकार थे, बेशक एक सच्चे महानायक। उनके लिए पाश्र्व गायन करना मेरे लिए सम्मान की बात है। उनके जैसे दुर्लभ कलाकार के साथ मैंने कई फिल्में कीं।"

मन्ना डे ने राजेश खन्ना की फिल्म 'आनंद' (1971) के गाने-जिंदगी कैसी है पहेली, 'बावर्ची' (1972) के-तुम बिन जीवन कैसा जीवन, 'आविष्कार' (1973)-हंसाने की चाह ने कितना मुझे, 'महबूबा' (1976) के-गोरी तेरी पैजनियां' में अपनी आवाज दी थी।

मन्ना ने कहा, "उनके साथ काम करना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। उनके लिए गाया मेरा हर गाना सफल रहा। खासकर 'बावर्ची' और 'आनंद' फिल्म का गाना। हम समारोह पर मिला करते थे। वह बातचीत करने के लिए और दोस्ती के लिहाज से अच्छे इंसान थे।"

राजेश खन्ना पर फिल्माए गए 'आनंद' फिल्म के 'जिंदगी कैसी है पहेली' गाने में अपनी आवाज देने वाले गायक मन्ना डे ने कहा, "मुझे उनके गाना फिल्माने का अंदाज पसंद था।

किसी गाने की सफलता इस बात पर निर्भर क रती है कि एक अभिनेता उसे कैसे फिल्माता है। वह गाने के फिल्माने में बेहतरीन थे। मैं कभी भी उनके कर्ज को नहीं उतार पाउंगा।" लंबी बीमारी के बाद राजेश खन्ना का बुधवार को निधन हो गया। वह 69 साल के थे।